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वो बचपन की यादें ,वो बचपन का मंजर

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 25, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 

वो बचपन की यादें, वो बचपन का मंजर
( कविता) बचपन विशेषांक
 
वह जीवन का मंजर
 कहां खो गया है
 कोई मेरे मन को
दे इतना बता। 
हुई क्या मेरे मन से
 ऐसी खता ?

 वो जीवन का समरस
 कहांँ खो गया है ?
बताओ मेरे मन को
 क्या हो गया है?
वह जीवन का मंजर
 कहां खो गया है ?  

 चंँचल हंँसी
 छोटी-छोटी शरारत।
 कभी प्यार के
 बोल मीठे भरे थे  
अल्हड़ से जीवन की
 छोटी हिकारत ।।

प्रीत के छोटे लम्हों को
क्या हो गया है?
वो जीवन का मंजर
कहां खो गया है  ?  

हरिशंकर सिंह सारांश 

 

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