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"वो बचपन की यादें " (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 13, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता
"वो बचपन की यादें "(कविता)

कोई मुझको लौटा दे
जीने की राहेें ,
 वो सावन की रिमझिम
 वो अल्हड़  सा जीवन।
 
वो नटखट सी बातें
वो बचपन का खेला,
 वो नन्ही सी बाहें,
 कोई मुझको लौटा दे
 जीने की राहेें।।

 वो गीतों का मेला
वो लोगों की बातें ,
कोई मुझको लौटा दे
 बचपन की यादें ।

चला था सफर पर
 मैं निश्चिंत होकर ,
कभी भी न खाई थी,
 मैंने ठोकर ।।

वो अचरज का आलम
वो प्यारी सी सिसकी ,
वो जीने की राहें,
 कोई मुझको लौटा दे
 बचपन की यादें।।

वो माता का आंँचल
वो गलियों का मेला,
 वो छोटी सी खुशियांँ
 वो नावों का रेला ।।

वो पानी में छप छप
वो बचपन के सपने
वो मांँ की दुआएंँ।।

 कोई मुझको लौटा दे
 जीने की राहें।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

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