"तुम इस तरह थामो कि वह पतवार बन जाए" (कविता)'s image
Poetry1 min read

"तुम इस तरह थामो कि वह पतवार बन जाए" (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 6, 2022
Share0 Bookmarks 2239 Reads1 Likes
मेरी लेखनी ,मेरी कविता
"कलम तुम इस तरह थामो कि वह पतवार बन जाए" (कविता) गुरु -शिष्य विशेषांक 

तू मेरी रागिनी बन जा
मैं तेरा राग बन जाऊंँ।

 जमाना देखता रह जाए
 मेरी दस्तकारी को
 मैं ऐसा ज्ञान का दीपक
 तेरे जीवन में ले जाऊंँ।

 तू मेरी रागिनी बन जा
मैं तेरा राग बन जाऊंँ।

 कलम को इस तरह थामो
 कि वह पतवार बन जाए।
 मैं तेरी नाव का ऐसा
 मुकम्मल घाट बन जाऊंँ।।

 तू मेरी रागिनी बन जा
 मैं तेरा राग बन जाऊंँ।।

 बड़ी उम्मीद से हर पल
 तुझे हर जन निहारे है,
 उसी उम्मीद का प्यारा दुलारा
 गीत बन जाऊंँ।।

 तू मेरी रागिनी बन जा
मैं तेरा राग बन जाऊंँ।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts