तू मेरा कभी था ही नहीं (कविता)'s image
Poetry1 min read

तू मेरा कभी था ही नहीं (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' July 17, 2022
Share0 Bookmarks 122 Reads1 Likes
मेरी लेखनी मेरी कविता
तू मेरा कभी था ही नहीं
(कविता)

कुछ कहना था
 तुमने सुना ही नहीं।

हाथ बढ़ाया तो था
 तुमने थामा ही नहीं।

तेरे संग चलना था
 तू रुका ही नहीं। 
  
रास्ते तो हमने बदले थे
 तेरे वास्ते
पर तू आगे बढ़ गया,
 तूने देखा तक नहीं।

 तेरे साथ ही तो चाहा था
अपना नाम जोड़ना
 पर तू कभी रुका ही नहीं।
 
 कुछ कहना था तुमसे
 तुमने सुना ही नहीं।।

हरिशंकर सिंह सारांश    

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts