"तू चंचल, तू अविरल
 तू नदियों की रानी"
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"तू चंचल, तू अविरल तू नदियों की रानी" (कविता ) सदानीरा गंँगा माँ

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 6, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी कविता 
"तू चंँचल, तू अविरल
तू नदियों की रानी"
(कविता) सदानीरा
 गंँगा मां  

तू चंँचल
 तू अविरल
तू नदियों की रानी।
 तू अविराम आंँगन के आंँचल की रानी ।।

तू मेघों का संँबल
तू दिनमान वानी
सदा ही रही है ,
तू पावन धरा पर
ऋषियों के साधन की निर्मल कहानी।

 तू चंचल, तू अविरल
तू नदियों की रानी।
 तू अविराम आँगन के आंँचल की रानी ।।

तू देवों का बासर
 तू मनुजों की ताकत
तू सींंचे धरा को
तू बसुधा की वानी।

तू चंँचल ,तू अविरल
 तू नदियों की रानी ।
तू अविराम आंँगन के आंँचल की रानी ।।

 अमृत धरा पर बहा जा रहा है,
 तू शिवजी के सिर की लटाओं की रानी ।

तू चंँचल, तू अविरल
 तू नदियों की रानी। 
तू अविराम आँगन के आंँचल की रानी ।।

जय गंँगा माता

 हरिशंकर सिंह सारांश 

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