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थोड़ा दुनियाँ से हटकर चल (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' May 11, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
थोड़ा दुनियाँ से हटकर चल
( कविता)प्रेरणा विशेषांक 

थोड़ा दुनियाँ से हटकर चल
 कुछ करना है तो डट कर चल
 लीक पर तो सभी चल लेते हैं
 कभी इतिहास को पलट कर चल।।

बिना काम के मुकाम कैसा, 
बिना मेहनत के दाम कैसा।
जब तक ना हासिल हो मंजिल
राह में आराम कैसा ।।

अर्जुन सा निशाना रख
मन में न कोई बहाना रख।
लक्ष्य सामने है बस
उसी पर अपना ठिकाना रख ।।

सोच मत साकार कर
 कर्मों से अपने प्यार कर,
मिलेगा तेरी मेहनत का फल 
न किसी और का इंतजार कर ।।

जो रहे अडिग आज उनके पीछे
लोगों के मेले हैं ,
जो चले सत्य पथ पर ,
उनके सामने रास्ते घनेरे हैं ,
अपने पथ का ध्यान कर,
सफल हो मंजिल पर चल 
कुछ करना है तो डट कर चल ।।

हरिशंकर सिंह सारांश      

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