"प्रेम के अक्षर न बदलना" 
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"प्रेम के अक्षर न बदलना" (कविता)दोस्ती के नाम पैगाम

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 1, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी कविता 
"प्रेम के अक्षर न बदलना"
(कविता) दोस्तों के नाम एक पैगाम  

कुछ भी तो नहीं इनके  बराबर; न बदलना।
ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।।

हालात में बदलाव बड़ी बात नहीं है,
 है बात बड़ी ,आप के तेवर न बदलना ।

ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना।।

फितरत भी बदल जाती है, बदले जो मुकद्दर,
 ऐसा है तो अच्छा है, मुकद्दर न बदलना।
  
ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।।

अनजाने वक्त के आंँसू हजार हैं, खुशहाल जिंदगी के लम्हे न बदलना ।

ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।।

जरूरत के वक्त पर तुम काम सब के आओ, सद्भाव जिंदगी के , हरगिज़ न बदलना ।

ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।

करना न किनारा ,आए जो मुसीबत ,इस दोस्ती के फलसफे को हरगिज न बदलना।

 ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।।

न कह सके किसी से ,वह तुमको बताते, येे यकीन जिंदगी का बिल्कुल न बदलना ।

ढाई ही सही प्रेम के अक्षर न बदलना ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 

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