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प्राणी एक अनोखा पाया( कविता )

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 15, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
प्राणी  एक अनोखा पाया
 (कविता) 

प्राणी एक अनोखा पाया। 
सोच प्रबल आंँखों में सपने 
भौतिक सुख पर
यह बौराया
 प्राणी  एक अनोखा पाया।।

लालच मन संग्रह करने का 
बड़ी लालसा भारी। 
 नित नित नूतन काज करे
जस सबरस की बीमारी।।
तरह-तरह के जतन करे 
झोली में भरने को माया।
 प्राणी एक अनोखा पाया ।।

आकंठ प्रेम की चाहत है।  
पल भर ना इसको राहत है ।
कंचन काया को पाकर भी 
है चैन नहीं उद्वालित  है।।
जोड़ जोड़ तृन तृन को इसने 
जीवन पुंँज बनाया।
 प्राणी एक अनोखा पाया।।

अपनेपन का भाव नहीं
माया की दौड़ लगाता है ।
जीवन का लक्ष्य भूलकर यह 
बेगारी में लग जाता है ।।
छोड़ दिया समरस का रस्ता
जीवन  पंँख बनाया ।।
प्राणी  एक अनोखा पाया।। 

हरिशंकर सिंह सारांश 



   

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