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मेरा भारत इस दुनियाँ में सूरज बनकर छाए (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 24, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी कविता 
"मेरा भारत इस दुनिया में सूरज बनकर छाए"
(कविता)देशभक्ति विशेषांक 

हे जगत नंदिनी जग माता
 कुछ ऐसा कर दिखला दे।।
 भारत मांँ का
नाम जगत में
 चारों दिश फैला दे ।

जात धर्म विद्वेष
 द्वेष का
अंतर मिटता जाए ।
मेरा भारत
इस दुनियाँ में
सूरज बनकर छाए।।

 विनती तुमसे यही मात
 बस इतना सा
हो जाए ,
सबका सोया अंतर्मन
 अब फिर से जग जाए।। 

हरिशंकर सिंह सारांश

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