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मौसम आज पतंगों का है (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' August 11, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
मौसम आज पतंगों का है
(कविता)

मौसम आज पतंगों का है
 नभ में राज पतंगों का है।
इंद्रधनुष के रंगों का है
 मौसम नई उमंगों का है।।

निकले सब ले डोर पतंगें
सुंदर सी चौकोर पतंगे
उड़ा रहे कर शोर पतंगे
देखो चारों ओर पतंगे ।।

उड़ी पतंगेें बस्ती बस्ती
 कोई महंगी कोई सस्ती 
पर न किसी में फूट परस्ती
 उड़ा रहे सब लेकर मस्ती।।

चली डोर पर बैठ पतंगे 
इठलाती सी ऐंंठ पतंगे,
नभ में कर घुसपैठ पतंगे
करें परस्पर भेंट पतंगे ।।

हर टोली ले खड़ी पतंगे
कुछ छोटी कुछ बड़ी पतंगेें 
आसमान में उड़ी पतंगेें
पेंंच लड़ाने बढी पतंगेें।।

कुछ के छक्के छूट रहे हैं
कुछ के डोरे टूट रहे हैं,
कुछ रंगीले दौड़ रहे हैं ,
कटी पतंगेें  लूट रहे हैं ।।

हरिशंकर सिंह सारांश      

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