ज्ञान की डोर थाम (कविता )'s image
Poetry1 min read

ज्ञान की डोर थाम (कविता )

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' November 12, 2022
Share0 Bookmarks 101 Reads1 Likes
मेरी लेखनी मेरी कविता 
ज्ञान की डोर थाम (कविता )

ज्ञान  की डोर थाम
जीवन को मुकम्मल बना,
भौतिकता की चाह में
क्यों भागता  फिरता भला ।

जिंदगी के सफर में
 ज्ञान तेरा पास हो,
तू जहां पर खड़ा हो
हरगिज़ न काली रात।।

काम आए सभी के 
मुसीबत में सबके साथ हो 
जिंदगी की राहमें
हर वक्त तू दिनमान हूो।।

सबल हो ,धवल हो 
आंखों में तेज प्रचंड हो ।
ज्ञान की ज्योति जला
क्या सोचता नाहक खड़ा ।।
भौतिकता की चाह में
 क्यों भागता फिरता भला।।

हरिशंकर सिंह सारांश      

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts