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जीवन का किस्सा है कितना अजीब (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 15, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी करता 
जीवन का किस्सा है कितना अजीब
(कविता)

जीवन का किस्सा है
 कितना अजीब।
 कभी खिलखिलाता है
 रुठा नसीब।।
जीवन का किस्सा है
कितना अजीब।।

कभी आस लाता 
जमाने के दर पर 
कभी दूर हमको
दिखाता सलीब ।
जीवन का किस्सा है
 कितना अजीब ।।

कभी अपनेपन की
 कहानी सुनाता।
कभी भूले भटकों को
नजदीक लाता ।।
सभी को सुनाता है
 नज्मे हबीब।।
जीवन का किस्सा है
 कितना अजीब।। 

कभी यह समंदर की
 लहरों की भांँति। 
अनजान पंँछी के
 पंँखों की भांँति ।।
उड़े दूर तक आस
मंजिल की लेकर ।
दिखाता है सबको
 मंजिल लजीब।।
 जीवन का किस्सा है
 कितना अजीब ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 
  
 

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