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"हमें ऐसे न भरमाओ तुम्हारी याद आती है "

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 21, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता
"हमें ऐसे न वहलाओ तुम्हारी याद आती है" (कविता)

हमें ऐसे न बहलाओ
 तुम्हारी याद आती है।

 कभी वह जख्म देती है
कभी हमको रुलाती है।
 हमें ऐसे न बहलाओ
 तुम्हारी याद आती है।। 
  
कभी इस दिल का सूनापन
 निहारो आके दीवानी।
 कसक इस बेरुखे दिल की
 हमें झकझोर जाती है ।
हमें ऐसे न वहलाओ
तुम्हारी याद आती है  ।।

कभी तू नीर बनती है
 कभी बादल में छाती है।
 कभी बेचैन आंँखों में
मेरे आंँसू भी लाती है।
 हमें ऐसे न वहलाओ
 तुम्हारी याद आती है ।।

कभी सोना ,कभी जगना
तड़प जीवन में देखी है।
 कभी बातों का जादू है
 कभी जीवन की नेकी है।।
 कभी जिंदादिली की
 वह कहानी याद आती है।
 हमें ऐसे न वहलाओ
तुम्हारी याद आती है।।
 
कभी रोना कभी हंँसना
तो जीवन का फलसफा है,
 कभी लाखों नियामत हैं
 कभी बस बेकरारी है। 
हमारे मन से ना खेलो
 हमारी नींद जाती है।।
 हमें ऐसे न वहलाओ
 तुम्हारी याद आती है।।

 ये मौसम रंँग लाता है
कभी पानी बरसता है।
 कभी पानी की चाहत में
 ये चातक भी तरसता है।।
 कहीं पर भी दिलों के
 तार मिलते हैं तो मिलने दो।

कहीं सागर की लहरों को
 तड़पने दो, मचलने दो ।
पकड़ लो ऐसी मंजिल को
 जो सागर पार लाती है।
 हमें ऐसे न वहलाओ
तुम्हारी याद आती है।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

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