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"गुरुओं का सम्मान रहे" कविता (शिक्षक विशेषांक )

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 6, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"गुरुओं का सम्मान रहे"
(कविता) शिक्षक विशेषांक 

चंँचल स्वभाव
बच्चों का है,
 लेकिन मन में
यह ध्यान रहे।।

 गर जीवन
श्रेष्ठ बनाना है
तो गुरुओं का
 सम्मान रहे ।।

आज अगर
परवाह नहीं
 जीवन का सार
 विफल होगा।

 तुम पुंँज प्रकाश टटोलोगेे 
 पर चारों दिश में
तम होगा ।।

बीता समय
 न वापस आता
 पछतावा मन में होगा ।।

जो गुरुओं ने
हमें सिखाया
उसका सबको
संज्ञान रहे ।।

गर जीवन श्रेष्ठ
 बनाना है
तो गुरुओं का
सम्मान रहे।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

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