एक चींटी को देखा( कविता )'s image
Poetry1 min read

एक चींटी को देखा( कविता )

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 8, 2022
Share0 Bookmarks 2425 Reads2 Likes
मेरी लेखनी मेरी कविता 

एक चींटी को देखा (कविता)

एक चींटी को देखा।
 संस्कार और स्वाभिमान की
 छोटी सी नन्हीं रेखा। 

,समय का मूल्य समझती है
 अनुशासन में रहती है।
 वह  छोटी सी प्राणी है
 पर मत समझो अज्ञानी है। 
 कठिन परिश्रम करो जगत में
सफल करो जीवन रेखा।
एक चींटी को देखा ।।
 
 अमर संगठन के बल पर
 सबको यही सिखाती है
 जग में आए कुछ काम करो। 
जीवन अपना साकार करो।
मिल कर रहो
 एक हो जाओ
 बदल सको अपना लेखा। 
एक चींटी को देखा।।

एक साथ मिलकर रहने की
एक अनूठी छाया है
 काम संगठन में करती है।
 सबको यही सिखाया है ।।
अमिट ज्ञान और अमिट प्राण की
छोटी सी नन्ही मेघा ।
एक चींटी को देखा   ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 
 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts