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आग सीने में लगा कर सोया कर( कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' July 14, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता
आग सीने में लगा कर सोया कर
(कविता )

हर नक्श जहन से
 मिटा कर सोया कर ,
तू ये सारी दुनियाँ
 भुला कर सोया कर।।

क्या खोया क्या पाया
 क्या ढूंढ रहा है ,
तू सब कुछ खुदा को
 बता कर सोया कर,
हर  नक्स जहन से
 मिटा कर सोया कर।।

नींद भले कितनी ही
गहरी हो जाए  ,
पर तू ख्वाबों को
जगा कर सोया कर,
हर नक्श जहन से
 मिटा कर सोया क।।

मखमली एहसास
 तुझे सोने नहीं देगा
जमीन पर बिस्तर
 बिछा कर सोया कर ।
हर नक्श जहन से
 मिटा कर सोया कर।। 

कल फिर मुलाकात
दुनियाँ से होगी,
चिराग ए उम्मीद
 जगा कर सोया कर ,
हर नक्श जहन से
मिटा कर सोया कर ।।

दिल की लौ भी
बुझ जाती है,
आग सीने में
लगा कर सोया कर ,
हर  नक्श जहन से
 मिटा कर सोया कर।।

मशीनी दौर में
एहसास न मर जाए कहीं ,
दो-चार आंसू
बहा के सोया कर,
हर नक्श जहन से
मिटा कर सोया कर ।।

हरिशंकर सिंह सारांश      
    

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