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सुख के सवेरे में

HarishHarish November 15, 2021
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सुख के सवेरे में,

एक्सप्रेस सी गुज़रती है


गम की रात में,

पैसेंजर सी थम जाती है


ज़िंदगी एक रेल है,

वक्त के साथ रफ़्तार बदल जाती है”


-हरीश @Harish_cso

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