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जज्बात़ और अल्फ़ाज़

gunjan sodhagunjan sodha October 30, 2021
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जज्बा़त वही रह जाते हैं,
बस अल्फाज़ बदलते जाते हैं
फैज़ के शेर, पाश की कविता से,
कभी इश्क करे, कभी प्रेम करे


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