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ज़िंदगी धुंआ-धुआं है

गोपाल भोजकगोपाल भोजक August 31, 2021
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तेरे ख़याल में ज़िंदगी धुआं-धुआं है,

तू आये न आये हम इंतज़ार करते है।


©गोपाल भोजक

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