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संयुक्त परिवार का महत्व।

गोपाल भोजकगोपाल भोजक May 15, 2022
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संयुक्त परिवार का महत्व।



आज 15 मई है इस दिन को अंतराष्ट्रीय परिवार दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हमें पारिवारिक रिश्तों एवम संयुक्त परिवार के महत्व को समझने की जरूरत है।

वर्तमान में पारिवारिक सदस्य के उच्चशिक्षा, नौकरी के लिए बाहर जाने से संयुक्त परिवार खत्म हो रहे है। छोटे परिवार भले ही हमे अपना स्पेस और अपनी मर्जी से उठने, बैठने, पहनने, और दिनचर्या की आज़ादी देते है, लेकिन इससे घर के बड़े बुजुर्गों से मिलने वाले प्यार और रिश्तों की समझ से हम दूर हो जाते है।

संयुक्त परिवार में रहकर बच्चा बड़ो का आदर करना, त्याग भावना, एक दूसरे का सम्मान करना जैसी अच्छी आदतें बचपन से ही सीख जाता है। एकल परिवार के कामकाजी माता पिता के पास वक्त की कमी के कान बच्चे दादा-दादी, ताया-ताई, चाचा-चाची, बुआ, बड़े छोटे रिश्ते के भाई बहनों के सम्मान, प्यार और अनुभव से वंचित रह जाते है। इस कारण से परिजनों में आपसी प्यार, इज्जत, सहनशाक्ति भी कम होती जा रही है।  

संयुक्त परिवार में सास से लेकर जेठानी, देवरानी, ननद सभी घर की जिम्मेदारी उठाते हैं। जिससे घर के काम का बोझ अकेले के कंधो पर नहीं होता। नौकरी करने वाली महिलाएं बिना टेंशन के ऑफिस जा सकती है, क्योंकि उनके पीछे घर और उनके छोटे बच्चों को संभालने के लिए दूसरे लोग होते हैं।


संयुक्त परिवार में दाम्पत्य जीवन मे भी प्यार बढ़ता है। पति पत्नी एक-दूसरे से बात करने के लिए वक्त निकाल पाते हैं। और मनमुटाव होने पर घर के बड़े-बुजुर्ग समझाने के लिए भी होते हैं।

नौकरों के भरोसे पलने वाले एकल परिवार के बच्चों के मुकाबले संयुक्त परिवार के बच्चों की परवरिश अच्छी होती है। घर के बड़े बुजुर्ग बच्चो को कहानी और किस्सों के माध्यम से अनेक जीवन शिक्षाये दे देते है। वही बच्चो को सुरक्षित माहौल भी मिलता है।

एक सन्तान वाले परिवारों की भावी पीढियां आने वाले समय मे बुआ, मासी, मामा, चाचा, ताऊ जैसे रिश्तों के मायने हो भूल जायेंग।

©गोपाल भोजक


#अंतरराष्ट्रीय_परिवार_दिवस

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