पतझड़....'s image
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सूखे के पत्तों की आहट, मुझको याद दिलाती है।

पतझड़ के मौसम में भी, इक महक छा जाती है।


दिल का हाल न पूछो हमसे, प्यार तुम से कितना है,

सोच में जब तुम आती हो, धड़कन रुक सी जाती है।



तुम से ऐसा लगता था, पास मेरे सब कुछ है,

अब सब कुछ सुना है तन्हाइयों की बस्ती में।


वक्त कभी न थमता था मिलने जब तुम आती थी,

सूरज अब रुक सा गया, रात की कालिख बढ़ने लगी।


©गोपाल भोजक

#विश्व_कविता_दिवस



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