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इन धड़कनों का साज है तूं...

गोपाल भोजकगोपाल भोजक May 16, 2022
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मेरी ख़ामोशियों का राज है तू,   


दिल की धड़कनों का साज़ है तू।


वक़्त तो बहता हुआ दरिया है,  


मैं जो कल तक था वही आज हूँ।


©गोपाल भोजक

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