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बर्बादियों का हस्र

गोपाल भोजकगोपाल भोजक April 19, 2022
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मेरी बर्बादियों का हस्र तुम क्या जानो,

शाम ढले कभी मिलो तो पता चले।

©गोपाल भोजक

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