अरमानों को समेट दो...'s image
Love PoetryPoetry1 min read

अरमानों को समेट दो...

गोपाल भोजकगोपाल भोजक February 17, 2022
Share0 Bookmarks 145 Reads0 Likes

मेरे अरमानों को समेट भी दो तुम,

मशविरा तो सारा जहां देता है।

©गोपाल भोजक

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts