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शून्य को ताकता मेरा ह्रदय

girvaani.pranikyaagirvaani.pranikyaa January 17, 2023
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शून्य को ताकता मेरा ह्रदय


शून्य को ताकता मेरा ह्रदय 


मदद को पुकारता है 


अंधकार में रौशनी को ढूंढता है 


धित्कार है इस पुकार पर 


अपनी ही चीज़ को तरसता है मेरा ह्रदय 


शून्य को ताकता है मेरा ह्रदय 


लालच की इस लहर में क्यों डूब गया है स्वाभिमान 


कहाँ गया इस अंधकार में मेरा आत्मसम्मान 


अपनों की पुकार में क्यों खो गई मेरी पहचान 


दूसरों की चाह में क्यों खो गई मेरी मुस्कान 


भूल क्यों मैं गई कि अलादीन का जिन्न नहीं 


हूँ तो मैं भी इंसान 


ह्रदय के एक कोने में जलती है आग 


क्यों अंधकार में डूब गया मेरा विश्‍वास 


क्यों शून्य को ताकता मेरा ह्रदय


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