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मैं इठला हुआ हिमालय हूँ

girvaani.pranikyaagirvaani.pranikyaa January 17, 2023
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मैं इठला हुआ हिमालय हूँ


मैं इठला हुआ हिमालय हूँ 


जल-जल को मैं ललचाया हूँ 


किस दृष्टि से देखों इसको 


घिर आने को साँसे रुकती 


दीप्ति नवल के चरणों में 


मस्तक की आशा शिथिल हुई 


गंगा के वेग को झोक दिया 


निर्मित क्यों इसका रोक दिया 


मैं वरदानों में घिरा हुआ 


अभिश्रापों से मैं मुक्त हुआ 


चितवन मैं उपवन सूख गया 


अक्षत से शिखिर नमन हुआ 


मैं इठला हुआ हिमालय हूँ 


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