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इन्तज़ार


मेरे दोस्त, तू मेरा यार ना हुआ तो ना सही

जिन्दगी में साथ ना चला तो भी ना सही

चल पड़ा हूं अकेला कदम कदम पथरीली राहों पे


बालों में तेरे शौकसे सजाये थे मैंने फूल कितने

वो खुशबू अबभी हवाओंमें लहराती है, ये अच्छा हुआ

उन लम्होंके सूखे फूल आजभी मेरे किताब-ए-जिस्तमें महकते हैं


देख कर तेरी सूरत चेहरे पे मेरे आ जाती थी मुस्कान

शुक्र है तेरा तूने मुझे रूलाया तो नहीं, ये अच्छा हुआ

वोही सूरत आजभी मेरे रूह-ओ-जिस्म को रोशन करती है


किये मुझसे कितने वादे तूने, ना निभा सका तो ना सही

उन सभी वादों को तू आज तक भूला नहीं, ये अच्छा हुआ

वादोंको पूरा करने आयेगा, ये उम्मीद मुझे जिन्दा रखें है


मेरे जिन्दगी में तू चिराग-ए-सर-ए-राह-ए-इश्क ना बना

जिन्दगी के लम्बे सफ़र में लेकिन मील का पत्थर तो बना

सफ़रके किसी मोड़ पर तू मिलेगा, उसी मोड़ के इन्तज़ार में हूं मैं 


इब्न-ए-बब्बन

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