मैं छोटा's image
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मैं अभी छोटा हूं ,
खुद पर खोटा हूं ,
कहां बांध लिया ना जाने ,
अब चिंता लाया हूं।
जाल ही जाल है या जाल में जाल है ,
गुमान हुआ था अभी हाल बहाल है ,

फिर पड़ता ख़्याल में
लो हुआ बाल मैं ,

ललक दबी है? या उठा अहम ?
कहां बेचा है? वो अनमोल रतन ?
मृत्यु से अमर है सौदा अगर ,
मैंने मुक्ती दिया और बांधा है मन।

बेचैन पड़कर मैं शांति खोकर ,
अपना ना रहा अपना होकर ,
घबराता फिरता मन डर-डर कर ,
अवसाद घेरे है सारे पहर ।

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