भटकना's image
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कल्पना कितना भी कूद ले,
यथार्थ अज्ञात है,
पाबंदीया कितना भी लगा ले,
सत्य समझना है , फिर पार है,
दिखता है काटा , छूआ तो प्यार है,
जरा सा पिछा हटा क्या ?
लगा के माया परिवार है।

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