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ज़िन्दगी की यही रीत है…

Dr. SandeepDr. Sandeep May 10, 2022
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मिलना बिछड़ना फ़िर किसी से मिलना सिर्फ़ बहाना है

ज़िंदगी की यही रीत क़िस्मत का लिखा क़िस्सा पुराना है..

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मानता हूँ आसान नहीं किसी की यादों को यूँ भूला देना

पर रुकना नहीं चलते रहना ज़िंदगी का अज़ब फ़साना है..

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इश्क़ की ताक में मत बैठ बनारसी नज़रबाज़ों की तरह

उठ जा ढूँढ मोहब्बत की गलियों में देख वक़्त सुहाना है..

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फ़िर मिलेगा कोई हमस़फर राह-ए-इश्क़ के किसी मोड़पर

वीरान हुए चमन में फ़िर गुलिस्ताँ-ए-मोहब्बत खिलाना है..

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जो उजड़ गया था सैलाब में उस हर तिनके को जोड़कर

सपनों के जहाँ में एक छोटा सा आशियाँ फ़िर बसाना है..!!

#तुष्य

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