तुझसे नाराज़ हूँ ज़िंदगी...'s image
Poetry1 min read

तुझसे नाराज़ हूँ ज़िंदगी...

Dr. SandeepDr. Sandeep November 15, 2021
Share0 Bookmarks 45 Reads2 Likes

ऐ ज़िंदगी अब मैं तुझ से नाराज़ हो रहा हूँ

मैं ख़ुद को ख़ुद के कँधे पर उठाए ढो रहा हूँ..

तूने इतने दर्द दिए कि अब बिख़र गया हूँ

जो दी थी पहचान अब वो पहचान खो रहा हूँ..

आज वो बहुत याद आ रहे बस ये सोच रहा हूँ

अकेला हूँ बेबस हूँ और मैं बेहिसाब रो रहा हूँ..

कितने लेगी इम्तिहान अब जीना भूल रहा हूँ

ऐसा लग रहा है मौत की आग़ोश में सो रहा हूँ..

ख़ुदा बस कर मैं क्या गुनाह किए जा रहा हूँ

अबतो खून भरे अश्क़ों से जज़्बातों को धो रहा हूँ..✍️✍️✍️

#तुष्य

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts