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रश्क-ए-क़मर...

Dr. SandeepDr. Sandeep December 14, 2021
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मेरी रश्क-ए-क़मर जब तू मुझे बाहों में समाती है

देख इसे हवा भी हमारे बीच गुज़रने से शर्माती है..

तेरी आग़ोश में सर रख ऐसे मदहोश हो जाता हूँ

देख इसे चादँनी भी बादलों में हया से मुँह छुपाती है..

तेरी मोहब्बत का सुरूर कुछ यूँ मेरे ऊपर चढ़ा है

तू सियाह रातों में मेरी आँखों से नींदे चुराती है..

तेरे वज़ूद की ख़ुशबू कुछ ऐसे बसी है मेरी साँसों में

तेरी कल्पना तक आकर मेरे दिल की धड़कने बढ़ाती है..

बेशक मुझे अहल-ए-नज़र की पहुँच से कुछ दूर हो तुम

पर परी-जमाल तेरी लफ़्ज़-ए-क़लम मेरे होश उड़ाती है..!!

#तुष्य

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