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मेरी नज़्मों का जज़्बात हो तुम...

Dr. SandeepDr. Sandeep November 11, 2021
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दिल के लिए वो पैग़ाम-ए-हयात हो गई

आज अगर वो हर ख़ुशी में मेरे साथ हो गई..

गलत सुना था कि इश्क आँखों से होता है

यहां उसकी क़लम मेरी ग़मों की ईलाज हो गई..

हम तो उनके लफ़्जों पर ही दिल हार बैठे है

मन ही मन में वो सब कुछ मेरे यार हो गई..

मैं उनकी यादों में मरीज़-ए-मोहब्बत बन गया हूँ

वो आब-ए-हयात बन दिल के बेहद पास हो गई..

मेरे शब्दों की उसकी ख़ुशबू ऐसे रच-बस गई है

वो लिखते-लिखते मेरी नज़्मों का जज़्बात हो गई..!!

#तुष्य

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