पतझड़'s image
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पीड़ा का ताला देख
लौट गया बेरंग
एक सुबह मेरे द्वारे आया था बसन्त 

मैं पतझड़ अनुरागी 
करती रही बसन्त आगमन की
अंतहीन प्रतीक्षा

ऋतुएं नही 
रिश्तों मे गर्माहट की गुमशुदगी
ले आती है जीवन मे पतझड़ 

जानती हूं
अमलतास के पुष्पगुच्छ सी धूप ही
लौटाएगी मेरे जीवन मे  प्रेम बसंत

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