"दर्द -ए- देश"'s image
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कुछ तो होंगे वो लोग, जिनमें ‘दर्द -ए- देश’ रहा होगा…


उस समय आखिर, ऐसा क्या हुआ होगा…

कुछ तो होंगे वो लोग, जिनमें ‘दर्द -ए- देश’ रहा होगा।


क्या हुआ था आखिर उस दिन ऐसा, 

जब “देश-विभाजन” हुआ होगा…

कुछ तो होंगे वो लोग, जिनमें ‘दर्द -ए- देश’ रहा होगा।


कोई तो बताएं हमें आखिर, वो ‘मंज़र’ क्या हुआ होगा…

कुछ तो होंगे वो लोग, जिनमें ‘दर्द -ए- देश’ रहा होगा।


बातें थी शायद वो कुछ ऐसी, जिनमें गहरा कोई ‘राज’ छिपा होगा…

कुछ तो होंगे वो लोग, जिनमें ‘दर्द -ए- देश’ रहा होगा।


चाहते हैं हम जानना, तब की हवाओं का ‘मिज़ाज’ कैसा हुआ होगा…

कुछ तो होंगे वो लोग, जिनमें ‘दर्द -ए- देश’ रहा होगा।


क्या था वो ‘आगाज़’… 

क्या था वो ‘अंज़ाम’…

आखिर किसी को तो पता होगा…

कुछ तो होंगे वो लोग, जिनमें ‘दर्द -ए- देश’ रहा होगा।

 

             

             

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