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फ़िसल न जाये ,ये जिंदगी ।

Dilip LalwaniDilip Lalwani January 6, 2022
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2021 तो गुज़र चला है,
22 वां भी दौड़ पड़ा है,
फ़िसल न जाये ,ये जिंदगी,
किन सपनों को पकड़े खड़ा है।

फ़िसलती सी जाए है, ये जिंदगी,
मोम सी पिघलती ,ये जिंदगी,
हर पल अब तू जी ले जरा,
शाम के आगोश में ढ़लती जिंदगी।

हर पल अब तू जीने लगा है,
आसमां के तारे गिनने लगा है,
ज़िन्दगी अब तेरी बनी है बंदगी,
दरिया की लहरों में भीगने लगा है।

पल पल संवरती ये बंदगी,
छल छल छलकती ये बन्दगी,
हर फिक्र से बेपरवाह
अंधेरी रातों में चमकती ये बन्दगी।
 
अब क्यों फ़िसल सी जाए ,ये जिंदगी,
हीरे सी चमकती रोशन ये ज़िन्दगी।

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