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सूरज की ओर बढ़ता चल

DhirawatDhirawat February 6, 2022
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हौंसलो को कर बुलंद,

किस्मतों में भर दे रंग।

मुश्किलें चलेंगी संग,

मस्त रह, तू रह मलंग।

पास अंधेरों का छोर, बढ़ता चल,

चल सूरज की तू ओर, बढ़ता चल।


एक-एक रख कदम, चलता चल,

मंज़िल भी आप पास आएगी।

ज़िन्दगी के छलों को छलता चल,

एक दिन जीत आस जाएगी।

जान रख,

जुनून रख,

ख़त्म नाउम्मीद दौर करता चल,

चल सूरज की तू ओर, बढ़ता चल।


मझधार तैर पार करता चल,

खुद नदी ही यह कगार लाएगी।

परिपाटी तार-तार करता चल,

नयी पीढ़ी नये विचार लाएगी।

बन विहग,

उड़ विलग,

छोड़ विगत की तू डोर, उड़ता चल,

चल सूरज की तू ओर, बढ़ता चल।

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