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क़मर-ए-फलक से बेहतर है माहताब मेरा

DhirawatDhirawat February 16, 2022
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चांद जो ज़मीं पे उतर आया है,

फ़क़त ये मेरे इश्क का सरमाया है।

यहां इश्क के नशे में हैं चूर सभी,

क्या चाँद भी मशग़ूल होने आया है?

क़मर-ए-फलक से बेहतर, है माहताब मेरा,

सेहरा में, तिश्नगी में, तू ही है आब मेरा।

क़मर-ए-फलक से बेहतर, है माहताब मेरा...


रहता है रश्क में वो,

आया है अर्श से जो।

महबूब जैसा मेरा,

मिलता नहीं किसी को।

माहताब के मुताबिक,

जब वो हुआ मुखातिब,

माहताब-ए-अर्श बोला, “कहाँ है हिजाब तेरा”।

क़मर-ए-फलक से बेहतर, है माहताब मेरा...


मुझे जिसकी आरज़ू है,

जो सब की जुस्तजू है,

सारे जहाँ की ख़्वाहिश,

अदद वो एक तू है।

इक तेरे इश्क खातिर,

दुनिया से हुआ ग़ाफ़िल,

जन्नत की हूर अब तो, कर पूरा ख़्वाब मेरा?

क़मर-ए-फलक से बेहतर, है माहताब मेरा,

सेहरा में, तिश्नगी में, तू ही है आब मेरा।


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