है विजय अटल's image
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है विजय अटल कि तुम बढ़े चलो,
जय का ‌यह प्रहर कि तुम बढ़े चलो।

नसों में खौलती नदी,
दृढ़ निश्चय है यदि,
कृत संकल्प तृण मंझधार भी तिराएगा,
वो वीर क्या, जो ना पार लगा पाएगा?
पी जाओ दावानल कि तुम बढ़े चलो,
है विजय अटल कि तुम बढ़े चलो।

यहां गहरा अंधकार है,
तमस् के विकार हैं।
तिमिर विस्तारित ना डरा पाएगा,
तम तुम को नहीं निगल पाएगा।
है श्वास में अनल कि तुम बढ़े चलो,
है विजय अटल कि तुम बढ़े चलो।

विष का प्रसार हो,
हलाहल अपार हो,
पश्चात कालकूट सोम आएगा,
सिंधुविष पे जो विजय दिलाएगा।
ग्रीवा में गरल ले तुम बढ़े चलो,
है विजय अटल कि तुम बढ़े चलो।

तेजमयी उच्च भाल,
खड्ग काल से कराल,
प्रहस्त हस्त ले वो रेख,
बदले भाग्य का जो लेख।
काल पर विजयश्री जो दिलाएगा,
अपार स्वयं भी पार ना पा पाएगा,
कृत सरल जटिल फिर तुम बढ़े चलो,
है विजय अटल कि तुम बढ़े चलो।
जय का ‌यह प्रहर कि तुम बढ़े चलो।

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