रेशु's image
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वो मुझे घर पर भी बुलाती है 



वो पानी भी पिलाती है 



वो मुझे चाय भी पिलाती है



मेरे साथ बैठकर बातें भी बनाती है



वो मुझसे आंखें भी मिलाती है



जब भी मैं उससे पूछता हूं



क्या वह मुझे चाहती है



पता नहीं क्यों



ठहर सी जाती है



वो कुछ इस तरह से 



कमाल करती है 



आंखों से छूकर 



मुझे रेशु बना देती है.



वो सूफियाना इश्क कर



मेरे सब्र का इंतिहान लेती है....




दीपक (बेख्याली)


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