कदंबिनी गांगुली's image
Poetry1 min read

कदंबिनी गांगुली

deepak(बेख्याली)deepak(बेख्याली) October 12, 2022
Share0 Bookmarks 48 Reads0 Likes
अतीत में छुपे हुए शौर्य को
फिर से जगा रही वह मर्दानी

स्वतंत्रता के संग्राम में
कूद पड़ी वह नारी

 कदंबिनी गांगुली
 यह नाम नहीं मामूली 

पहली भारतीय महिला स्नातक बन
अपनी कलम से आंधी लाई 

गुलामी की जंजीरों में
मां भारती को एक पल देख ना पाई 

कुछ कर गुजरने का जज्बा 
आंखों में लिए तूफ़ान  

हर मुश्किल को उसने
सहज किया पार 

मां भारती की सेवा में
अपने दे दिए प्राण

अपने शौर्य से लिख दी
एक नई कहानी

कदंबिनी गांगुली
यह नाम नहीं मामूली 

मां भारती की इस बेटी के चरणों
में हम करते हैं बारंबार प्रणाम

जिसे स्वीकार नहीं था
मां भारती बनी रहे गुलाम

कदंबिनी गांगुली
यह नाम नहीं मामूली 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts