दिल का संदूक's image
1 min read

दिल का संदूक

DeepakDeepak December 21, 2021
Share0 Bookmarks 29 Reads0 Likes
   दिल का संदूक


आज मैंने मेरे दिल का संदूक खोला
सिवाय दर्द और गम के कुछ भी न मिला
एक नीली सीसी में रखे थे आंसू मेरे
जो बह आए थे आंखों से मेरी
जब बचपन के कुछ सपने पूरे ना हुए
एक काली डिब्बी में बंद थी सिसकियां मेरी
जो नाकामियों ने दी थी तोहफे में कभी
एक पोटली में कोई चीज रखी थी
खोल के देखा था मासूमियत थी मेरी
जो किसी को दिखाई न दी इतने अर्से से
इसलिए पत्थर हो चुकी थी
एक चिट्ठी पड़ी थी उसमें
जो शायद मैंने ही रखी थी
खोल के देखा तो लिखा था
यहां कोई किसी का नहीं
आज मैंने मेरे दिल का संदूक खोला
सिवाय दर्द और गम के कुछ भी न मिला
           
            दीपक

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts