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त्याग और सुकून

Deepak ChaudharyDeepak Chaudhary December 8, 2022
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रवि बम्बई शहर में रहता है उसका बेकरी का बिजनेस है वह खुद ही दुकानों दुकानों पर जा कर अपने समानो को बेचता है। रवि की पत्नी का नाम रीमा है। उनके दो बच्चे हैं। जिनका नाम आशुतोष और अंशिका है ; आशुतोष पांचवी कक्षा में पढता है जबकि अंशिका अभी बहुत छोटी है।

रवि का मूल निवास इलाहाबाद है जहां उसके पिता रमेशचन्द्र रहते हैं । एक समय था जब रमेशचन्द्र के पास ठीक ठाक मात्रा में कृषि भूमि थी पर बडे भाई के धोखा देने के कारण, सारी भूमि बडे भाई की हो गयी। उस समय एक कानून प्रचलित था जिसके तहत पिता की मृत्यु के बाद सारी जायदाद का मालिकाना हक बडे बेटे का होता था। अगर बडा बेटा चाहे तो कोर्ट में गवाही दे कर छोटे बेटे को हिस्सा दे सकता था, परन्तु रमेशचन्द्र के बडे भाई ने कोर्ट में उसको पहचानने से मना कर दिया।

                       
          उस समय रमेशचन्द्र के पास खाने तक पैसे नहीं थे। तब उन्होंने पडोसी से कुछ पैसे उधार लिए। वे, रवि जो उस समय बहुत छोटा था और पत्नी के साथ इलाहाबाद स्टेशन पहुंचे। जहां से उन्होंने कामायनी एक्सप्रेस ट्रेन पकडी, जो मुम्बई जा रही थी। दो सीट मिली, रवि को सीट न मिलने के कारण रवि अपने पिता के पैरों पर सिर रख कर सो गया।

रमेशचन्द्र को बम्बई में एक कंपनी में काम मिल गया, जिससे उनके परिवार का खर्चा चलने लगा। इस समय रमेशचन्द्र काफी बूढे हो चुके हैं, वे अब इलाहाबाद में ही रहते हैं।

रवि सुबह सुबह उठ कर अपने बेकरी के समानो को गाडी पर लाद रहा था और तभी बोला -

रवि - अंशिका की मम्मी, कुछ बना है कि ना
रीमा( अंशिका की मम्मी) - जी , सिर्फ मोट रोटी बनी है
रवि - देर हो रही है , जो भी बना हो बांध कर दे दो ;खाने का समय नहीं है, दोपहर में खा लूंगा !
रीमा - ठीक है, दो मिनट रूको दे रहीं हूँ  ...

रीमा -  अरे सुन रहे हो ...
रवि -  हूँ,
रीमा  - आशुतोष के स्कूल का फीस भरना है
रवि  - हाँ, पता है ; पर इस समय पैसा नहीं है
रीमा  - वो कह रहा था कि रोज रोज गुरुजी खडा करके फीस मांगते हैं ,जिससे उसे क्लास में शर्मिन्दा होना पडता है!
रवि  - हाँ ठीक है , दू चार दिन में जमा कर देते हैं
रवि - अच्छा, अब हम जाते हैं

रवि आठवीं पास है; रमेशचन्द्र उसे और आगे पढाना चाहते थे पर रवि का पढने में मन न लगा ,उसने पढाई छोड़ दी। वह इलेक्ट्रॉनिक का काम सीखना चाहता था तो उसके लिए रमेशचन्द्र ने पैसे दिए, पर इसमें भी रवि का मन न लगा। अंततः उसको भी सीखना बंद कर दिया। अब वह बेकरी के समानो को ही बेचता है।

रवि दुकान दुकान पर जा कर बेकरी के समानो को बेचता ,जो दुकान वाले उससे समान ले लेते वहां से वह प्रफुल्लित हो कर लौटता और जो दुकान वाले उससे समान नहीं लेते वहां से वह निराश होकर लौटता। दोपहर तक सामानों को बेचता रहा , दोपहर में जब उसे भूख लगी तो वह एक छोटे से ढाबे पर जाकर बैठ गया।

उस दुकान पर एक छोटू था, छोटू रवि के पास आया ...
छोटू - क्या चाहिए ?
रवि  - कुछ नहीं, बस पानी दे दो
छोटू  - हूँ ...

रवि ने मोट रोटी निकाला ,जो रीमा ने दिया था और खाने लगा ...बगल में एक महाशय बैठे हुए हैं , जिनका नाम अर्जुन है ,अर्जुन जिसकी थाली में दो किस्म की सब्जी, रोटी, चटनी ,दाल, चावल सब है ;वही रवि को सूखी रोटी खाते देख दंग रह गए। अर्जुन रवि से कुछ पूछना चाह रहा थे पर पूछ नहीं पा रहा थे। जब रवि अपनी रोटी  खत्म करके जाने लगा तो ...

अर्जुन - सुनिए
रवि - हां
अर्जुन -भाई आप सुखी रोटी क्यों खा रहे थे ? आप चाहते तो खाना मंगवा सकते थे !
रवि -भाई अगर मैं आपकी तरह एक थाली मंगवाता तो मेरे ₹50 चले जाते हैं, मुझे अपने बच्चे की फीस भरनी है वह रोज स्कूल में डांट खाता है इसलिए मैं सूखी रोटी खा रहा था जिससे मैं अपने पैसे बचा सकूं !

अर्जुन -वाह भाई ,
      मुझे आज समझ में आया, बाप बनना आसान है ;पर बाप की तरह 'त्याग' करना बहुत कठिन है !
रवि बिना कुछ बोले वहां से चला गया और अपने समानो को बेचने में लग गया ...

आज दिन भर में उसकी कुछ खास कमाई नहीं हुई है, वह आज के अपने परफॉर्मेंस से खुश नहीं है। वह उसी निराशा भाव से एक दुकान पर गया  -

रवि  - भाई; नमकीन, बिस्कुट, चाय वाला बिस्कुट, ब्रेड, टोस्ट ; कुछ भी लेना है ?
दुकान वाला - हाँ ; नमकीन 15 पैकेट दे दो , टोस्ट 20 पैकेट, बिस्कुट 30 पैकेट दे दो , चाय वाला बिस्कुट 10 पैकेट ही देना
रवि -  ब्रेड ?
दुकान वाला  - नहीं , उसे रहने दो
रवि  - ठीक  !
रवि को यहाँ से कुछ पैसे मिल गये

रात के 9:00 बज रहे हैं , वह घर लौट रहा है; सडक पर कुछ ही लोग दिखाई दे रहें हैं, धीरे-धीरे हवा बह रही है,  उसकी गाड़ी की स्पीड दिनभर की औसत स्पीड से तेज है, उसके बाल हवा में लहरा रहे हैं और वह गाना गा रहा है 'दीवाना हुआ बादल' और गाडी भगाए जा रहा है  मानो वह हवा में उड़ कर घर पहुंच जाना चाहता हो, रवि जल्द ही घर पहुंच गया।

रवि - आशुतोष ? 
आशुतोष - हां पापा ...
रवि - ये सामान उतरवा लो
आशुतोष - हां पापा, बस आया
दोनों बेकरी के समान को गाडी पर से उतार रहे हैं...

आशुतोष - पापा आज लग रहा है कुछ ज्यादा समानो की बिक्री हुई है
रवि - हाँ, एक दुकान वाले ने आज थोड़ा ज्यादा खरीदा 

समान रखने के बाद...

रवि - आशुतोष  ?
आशुतोष - हां
रवि - तुम्हारे स्कूल का फीस जमा करना है ना ?
आशुतोष -हाँ पापा
रवि - कल ले जाके जमा कर देना
आशुतोष - ठीक है

                 बच्चों की जरूरतें पूरी हो जाती है तो सबसे ज्यादा खुश मां होती है  रीमा रवि की ओर प्यार भरी नजरों से देखती है...

रवि रात में इधर-उधर करवट बदल रहा है पर उसे नींद नहीं आ रही है ...

रीमा - क्या हो गया, सो क्यों नहीं रहे ?
रवि - नींद नहीं आ रही ...
रीमा  - क्यों  ?
रवि  - पता नहीं ...
थोडी देर बाद रवि बोलता है ...

रवि - जानती हो ; जब मैं छोटा था, बाबा के साथ मुंबई आ रहा था तो 'मैं बाबा के पैरों पर सिर रख कर सो गया था ,आज तक वैसी सुकून भरी नींद नहीं सो पाया'

रीमा रवि के चेहरे पर प्यार से हाथ फेरती है और वे कुछ देर में सो जाते हैं...
                ~ दीपक चौधरी 

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