गांव की सैर's image
Poetry1 min read

गांव की सैर

Poetry4youthPoetry4youth January 20, 2023
Share0 Bookmarks 14 Reads0 Likes
चलो मैं आज तुमको जन्नत दिखाता हूं ,
मैं तो मैं तुम्हें आज अपने गांव के बारे में बताता हूं 
वह गांव जहां होता नारी का सम्मान है ,
आओगे कभी यहां तो जानोगे खुश रहना कितना आसान है ।
यूं तो लोग यहां थोड़ा ही कमाते हैं ,
पर घर के बुजुर्गों को कभी ना सताते हैं ।
पैसा हाय यह पैसा इसके लिए हम भी अपना शहर छोड़ आए थे ,
बहुत रोए थे जब मां को अकेला छोड़ आए थे 
 इसी गांव में मिलेंगे तुमको वो कई बूढ़े मां बाप और भाई,
जिन्होंने बहन की शादी के लिए अपनी जमीनें उठाई ।
पर तुम्हारा जितना भी है गम सब भूल जाओगे ,
शाम को अगर यहां चौपाल में जो बैठ जाओगे ।
बना लो लाख शहर में कांच की इमारतें ,
चैन आएगा जब गांव में बरगद की छांव में बैठ जाओगे
आदित्य कुमार शर्मा (poetry4youth)
https://youtu.be/svxUrg3oDl0

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts