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काव्य व्यंग

VIKKY SINGHVIKKY SINGH September 18, 2022
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जिसको देखो वो इश्क में ज़ार ज़ार बैठे है,

कुछ तो कलमगार तो कुछ बेरोजगार बैठे है। 

मौका मिले तो समझिएगा इश्क की रहनुमाई,

कुछ कटा लिए, कुछ कटवाने को तैयार बैठे है।

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