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दोस्ती का आभास

VIKKY SINGHVIKKY SINGH June 16, 2022
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लोग आते है लोग जाते है,
कुछ भूल जाते है, कुछ याद आते है।
इस आने जाने के कालचक्र में
कुछ इतने खास हो जाते है,
जैसे जीवन की हर एक सांस हो जाते है।

कुछ अच्छे कुछ बुरे,
कुछ धुंधली यादें, कुछ बिलकुल अधूरे,
कुछ अधूरी ख्वाहिश, कुछ जज़्बातों से पूरे,
कुछ दूर हो कर भी कहीं मुझ में खो से जाते है,
इस खोने पाने के कालचक्र में,
कुछ इतने खास हो जाते है,
जैसे जीवन की हर एक सांस हो जाते है।

जो होते है इतने खास जैसे विश्वास,
जो होते है इतने पास, जैसे जीवन का आभास,
जिनकी मौजूदगी, जीवन का विश्वास दिलाते है।
जिनके रूठने मनाने में, हम खुद को ढूंढ पाते है।
इसी रूठने मनाने के कालचक्र में,
कुछ इतने खास हो जाते है,
जैसे जीवन की हर एक सांस हो जाते है।

जिसके साथ एक रोटी भी, पूरा खाना हो,
दोस्ती भी ऐसी, जैसे कृष्ण सुदामा हो,
लेकिन दोस्ती से कहीं बढ़कर, अपनेपन का एहसास हो जाते है,
जिनकी आंसू और खुशियां हम भाप जाते है,
वो इतने खास हो जाते है,
इस खास और पास के कालचक्र में,

कुछ इतने खास हो जाते है,
जैसे जीवन की हर एक सांस हो जाते है।

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