जिंदगी क्या है?'s image
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जिंदगी एक अभिलाषा है, क्या गजब इसकी परिभाषा है।

जिंदगी क्या है मत पूछो ? संवर गई तो तकदीर और

बिखर गई तो तमाशा है।


जिंदगी क्या है? इसे समझने का थोड़ा प्रयास करते है। इंसान सिर्फ जीवन के एक पहलू को देखता है और महत्व देता है। इंसान सुख चाहता है लेकिन दुःख के लिए तैयार नही रहता है। जीवन रुपी सिक्के के दुःख और सुख दो पहलू है। अगर जीवन में एक आएगा तो निश्चित ही दूसरा आएगा।


इंसान अपने जीवन में सफलता चाहता है। लेकिन असफलता के लिए तैयार नही रहता है। सफलता और असफलता जिंदगी के सिक्के के दो पहलू है। जब एक जीवन में आता है तो दूसरा अपने आप ही आ जाता है। अगर इन्सान स्वयं को जिंदगी के दोनों पहलुओं के लिए तैयार रखता है तो वो दुःख, हार और असफलता में निराश नही होगा।


जो लोग कम पैसा खर्च करते है उन्हें हम कंजूस कहते है। लेकिन हम यह सोच ही नही पाते है कि उसे बचत करने में उतनी ख़ुशी मिलती है जितना कोई खर्च करने में खुश होता है। इंसान अपने जीवन में कोई कार्य बिना ख़ुशी के नही करता है। सकारात्मक सोच सुखमय जीवन देती है और नकारात्मक सोच दुखमय जीवन देती है।

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