ये जश्न-ए-आज़ादी मनाऊँ कैसे मैं's image
Poetry1 min read

ये जश्न-ए-आज़ादी मनाऊँ कैसे मैं

Sukeshini BudhawneSukeshini Budhawne August 14, 2022
Share0 Bookmarks 0 Reads1 Likes


ये जश्न-ए-आज़ादी मनाऊँ कैसे मैं
मुर्झाए गुलशन को हँसाऊँ कैसे मैं

याँ रास्तों को भेड़ियों ने घेरा हैं
वहशी,दरिंदो को भगाऊँ कैसे मैं

है आसमाँ ख़ौफ़-ओ-ख़तर से ग़म-ज़दा
बहनों, यकीं तुम को दिलाऊँ कैसे मैं

माँ तेरी गुड़िया को किसी ने तोड़ा है
इस हाल में ख़ुद को हँसाऊँ कैसे मैं

महफ़ूज़ होगी कब वतन की बेटियाँ 
सो बाम-ए-आज़ादी मनाऊँ कैसे मैं


- सुकेशिनी बुढावने 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts