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मोहिनी स्वरूप

Brijesh ChaturvediBrijesh Chaturvedi January 7, 2023
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आँखनि की कजरारी कटारि पै, घूँघट ढाँकि करी चतुराई l

फूलन कंचुकी धारि हिये, अरू सारी पराग के पुष्प जड़ाई l

छीन-कटि पै पलाश के बंध, औ पैजनि साजि, चली इतराई l

शंभु कौ योग डिगायौ तबै, जब मोहन मोहनियाँ बनि आई ll

-ब्रजेश

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