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वो बिछडा तो दस्त से रंग-ए-हिनाई ले जाएगा,
लबों का तबस्सुम आँखों से बीनाई ले जाएगा!!

फिर ना लौटेगा कभी मौसम-ए-गुल मेरे लिए,
वो तो गुल से खूश्बू बागों से रानाई ले जाएगा!!

उसके बग़ैर युँ ही भटकती फिरेगी खुशी दर-बदर,
मेरे ख्वाब भी सारे पलकों से हरजाई ले जाएगा!

बिखर बिखर न जाए सामाँ-ए-हस्ती बिछडकर,
सुकून-ए-क़ल्ब भी वो मुझ से सौदाई ले जाएगा!

अभी तो बडा आराम रुह को उसके सितम से है,
वो गया तो दिल के ज़ख्मों से पज़ीराई ले जाएगा!

इश्क़ किया है तुमने तो डुबना मुक़द्दर ठहरा "बीना"
वो दरिया-ए-ज़िस्त की लहरों से गहराई ले जाएगा!

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